हेलो दोस्तों! मैं हूँ भूषण जलछत्री। आज हम बात करेंगे ट्रेडिंग की दुनिया के दूसरे सबसे बड़े हथियार के बारे में, और वह हथियार है — रिस्क रिवॉर्ड (Risk-Reward Ratio in Hindi)।
ट्रेडिंग बिजनेस में रिस्क रिवॉर्ड एक ऐसा टूल है, जिसकी मदद से आप अपने Trading करियर को बुलंदियों तक पहुँचा सकते हैं। जिस प्रकार स्टॉपलॉस (Stoploss) का पालन करके आप अपने पैसों को सुरक्षित रखते हैं, ठीक उसी प्रकार रिस्क रिवॉर्ड का मतलब आपके द्वारा लिए गए ट्रेड में स्टॉपलॉस के अनुपात में टारगेट बुक करना होता है।
ट्रेडिंग में लंबे समय तक टिके रहने के लिए इसका पालन करना अति महत्वपूर्ण है। अगर आप इसे फॉलो नहीं करते हैं, तो आप कभी भी एक बड़ा और कंसिस्टेंट प्रॉफिट नहीं बना पाएंगे। रिस्क रिवॉर्ड ही वह महत्वपूर्ण पैमाना है जो यह तय करता है कि मार्केट से एग्जिट लेने के बाद आपकी जेब में प्रॉफिट आएगा या लॉस।
💡 KEY POINT
- ट्रेडिंग का स्तंभ: रिस्क रिवॉर्ड रेशियो (Risk-Reward Ratio) एंट्री लेने से पहले ही आपके संभावित मुनाफे और नुकसान की तुलना करता है।
- सफलता का गणित: एक बेहतर अनुपात (जैसे 1:2) आपको कम विन-रेट होने पर भी बाजार में लंबे समय तक प्रॉफिटेबल बनाए रखता है।
- अनिवार्य नियम: बिना सही स्टॉपलॉस और निश्चित टारगेट सेट किए ट्रेड करना केवल एक जुआ है, बिजनेस नहीं।
एक अच्छा रिस्क रिवॉर्ड रेशियो कैसा होना चाहिए?
मार्केट में अलग-अलग ट्रेडर्स अपनी रिस्क क्षमता (Risk Appetite) के हिसाब से अलग-अलग रिस्क रिवॉर्ड का पालन करते हैं। ट्रेडिंग में लोग कभी 1:1 रिस्क रिवॉर्ड फॉलो करते हैं, तो कोई 1:2, 1:3, 1:4 या 1:5 का इस्तेमाल करता है। कई प्रोफेशनल ट्रेडर्स अपने ट्रेड में इससे भी बड़ा टारगेट रखते हैं।
बड़े रिस्क रिवॉर्ड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर आपको लगातार 2-3 ट्रेड्स में लॉस हो भी जाए, तो एक ही प्रॉफिटेबल ट्रेड आपके सारे नुकसान को रिकवर कर देता है। एक समझदार ट्रेडर को अपने ट्रेड में कम से कम 1:2 का रिस्क रिवॉर्ड जरूर रखना चाहिए। इससे कम रेशियो रखने पर आपके नुकसान की संभावना बढ़ जाती है और अंत में आप नेट लॉस में आ जाते हैं।
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टोटल रिस्क अमाउंट: ₹0
कितनी Quantity खरीदें: 0 Shares
रिस्क-रिवॉर्ड कैसे काम करता है? (आसान उदाहरण)
आइए Risk Reward Ratio in Hindi इसे शेयर मार्केट के एक बहुत ही आसान और सीधे उदाहरण से समझते हैं:
मान लीजिए आपने किसी कंपनी का एक शेयर ₹100 पर खरीदा। अब आप इस ट्रेड में अपना रिस्क और प्रॉफिट पहले से तय करना चाहते हैं:
- स्टॉप-लॉस (Risk): आपने तय किया कि अगर शेयर की कीमत नीचे गिरकर ₹90 पर आएगी, तो आप उसे बेचकर बाहर निकल जाएंगे। यानी इस ट्रेड में आपका कुल रिस्क = ₹10 है।
- टारगेट प्राइस (Reward): इसके साथ ही आपने तय किया कि अगर शेयर की कीमत बढ़कर ₹120 पर जाएगी, तो आप अपना मुनाफा बुक कर लेंगे। यानी आपका कुल रिवॉर्ड = ₹20 है।
यहाँ आपका रिस्क ₹10 है और रिवॉर्ड ₹20 है। अनुपात (Ratio): 10 : 20 = 1 : 2

इसका सीधा मतलब यह हुआ कि आप मार्केट में ₹1 का नुकसान सहने के बदले ₹2 का मुनाफा कमाने की योजना बना रहे हैं। यही ट्रेडिंग का सही और वैज्ञानिक तरीका है।
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उदाहरण से समझें रिस्क रिवॉर्ड का गणित (Bitcoin Example)
आइए Risk Reward Ratio in Hindi को एक सीधे उदाहरण से समझते हैं कि रिस्क रिवॉर्ड कितना महत्वपूर्ण है। यह नियम स्टॉक, फ्यूचर्स, फॉरेक्स, कमोडिटी या क्रिप्टो (Crypto) सभी पर समान रूप से लागू होता है।
मान लेते हैं कि मैंने बिटकॉइन (Bitcoin) में एक महीने में कुल 50 ट्रेड्स लिए (यानी रोज के 2 ट्रेड)। इसमें मेरा प्रति ट्रेड रिस्क (Stoploss) ₹500 फिक्स है, और मेरा विन रेट (Win Rate) 50% है (यानी 50 में से 25 ट्रेड में प्रॉफिट और 25 में लॉस हुआ)।
अब देखते हैं कि अलग-अलग रिस्क रिवॉर्ड रेशियो में हमारा मंथली प्रॉफिट या लॉस कितना होगा:
1. रिस्क रिवॉर्ड 1:1 होने पर
कुल लॉस: 25 ट्रेड × ₹500 = ₹12,500
कुल प्रॉफिट: 25 ट्रेड × ₹500 = ₹12,500
नेट परिणाम: ₹12,500 (प्रॉफिट) - ₹12,500 (लॉस) = ₹0
ध्यान दें: यहाँ आपका प्रॉफिट शून्य है, लेकिन ब्रोकरेज, टैक्स और अन्य चार्जेस कटने के बाद आप जेब से घाटे में रहेंगे।
2. रिस्क रिवॉर्ड 1:2 होने पर
कुल लॉस: 25 ट्रेड × ₹500 = ₹12,500
कुल प्रॉफिट: 25 ट्रेड × ₹1000 = ₹25,000
नेट परिणाम: ₹25,000 - ₹12,500 = ₹12,500 शुद्ध मुनाफा
ध्यान दें: इसमें से अगर आप ब्रोकरेज और टैक्स काट भी लें, तब भी आप एक अच्छे प्रॉफिट में रहेंगे।
3. रिस्क रिवॉर्ड 1:3 होने पर
कुल लॉस: 25 ट्रेड × ₹500 = ₹12,500
कुल प्रॉफिट: 25 ट्रेड × ₹1500 = ₹37,500
नेट परिणाम: ₹37,500 - ₹12,500 = ₹25,000 शुद्ध मुनाफा
4. रिस्क रिवॉर्ड 1:4 होने पर
कुल लॉस: 25 ट्रेड × ₹500 = ₹12,500
कुल प्रॉफिट: 25 ट्रेड × ₹2000 = ₹50,000
नेट परिणाम: ₹50,000 - ₹12,500 = ₹37,500 शुद्ध मुनाफा
आपने देखा कि जैसे-जैसे मैंने रिस्क रिवॉर्ड का अनुपात बढ़ाया, वैसे-वैसे मेरा प्रॉफिट बढ़ता गया। इस पूरे उदाहरण में एक नियम सख्त और कॉमन था — मेरा लॉस (₹500) हमेशा फिक्स था। ट्रेडिंग का यह सबसे कड़ा नियम है कि आपको अपने लॉस को कभी बढ़ाना नहीं है, जबकि टारगेट को आप मार्केट की चाल के अनुसार बड़ा रख सकते हैं।
ब्रेक-इवन ज़ोन (The Breakeven Zone) और रिस्क रिवॉर्ड का जादू
ब्रेक-इवन ज़ोन का मतलब है — ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’। आइए समझते हैं कि स्टॉपलॉस फिक्स होने पर, नो-प्रॉफिट और नो-लॉस में रहने के लिए हमें 100 में से कितने ट्रेड सही करने होंगे (मैथमेटिकल ब्रेक-इवन विन रेट):
- 1:1 रिस्क रिवॉर्ड = 50% Win Rate: ब्रेक-इवन में रहने के लिए आपको 100 में से कम से कम 50 बार सही होना पड़ेगा।
- 1:2 रिस्क रिवॉर्ड = 33.3% Win Rate: यहाँ आपको ब्रेक-इवन में रहने के लिए 100 में से सिर्फ 34 ट्रेड्स सही लेने होंगे। यानी 66 ट्रेड गलत होने पर भी आपका पैसा सुरक्षित रहेगा।
- 1:3 रिस्क रिवॉर्ड = 25% Win Rate: इस रेशियो में आपको 100 में से सिर्फ 25 ट्रेड्स सही करने की जरूरत है। अगर आपके 75 ट्रेड्स लॉस में जाते हैं और सिर्फ 25 सही होते हैं, तब भी आप नो-लॉस ज़ोन में रहेंगे।
यही रिस्क रिवॉर्ड का असली जादू है! ट्रेडर्स भी इंसान होते हैं; वे अक्सर फोमो (FOMO – ट्रेड छूटने का डर) या लालच में आकर जल्दबाजी में गलत ट्रेड ले लेते हैं, जिससे नुकसान होता है। लेकिन अगर आपका रिस्क रिवॉर्ड बड़ा है, तो आपकी कुछ मानवीय गलतियाँ आसानी से कवर हो जाएंगी।
Risk Reward Ratio in Hindi को लाइव चार्ट पर कैसे सेट करें?

शुरुआती ट्रेडर्स को अक्सर यह समझने में दिक्कत होती है कि लाइव चार्ट पर 1:2 या 1:3 रेशियो कैसे देखें। इसके लिए आपको किसी कठिन गणित की जरूरत नहीं है।
ट्रेडिंगव्यू (TradingView) या अपने ब्रोकर के चार्टिंग सॉफ्टवेयर पर आपको दो जादुई टूल्स मिलते हैं:
- Long Position Tool: इसका इस्तेमाल तब करें जब आप मार्केट में शेयर खरीद रहे हों (Buy)।
- Short Position Tool: इसका इस्तेमाल तब करें जब आप मार्केट में शॉर्ट-सेलिंग कर रहे हों (Sell)।
जब आप इन टूल्स को अपनी एंट्री प्राइस पर क्लिक करके सेट करते हैं, तो ये चार्ट पर हरे और लाल रंग का बॉक्स बना देते हैं। यह टूल आपको अपने आप स्क्रीन पर ‘Risk Reward Ratio in Hindi ‘ का नंबर (जैसे 2, 3, या 4) दिखा देता है।
आपको बस अपने टारगेट और स्टॉपलॉस की लाइनों को इस तरह सेट करना है कि वहाँ रेशियो कम से कम 2 दिखाई दे।
एक कड़वा सच: बड़ा रिस्क रिवॉर्ड और विन रेट का संबंध
कई नए ट्रेडर्स सोचते हैं कि अगर 1:5 या 1:10 का रिस्क रिवॉर्ड इतना ही अच्छा है, तो हम हमेशा इसे ही क्यों न रखें? लेकिन यहाँ आपको ट्रेडिंग का एक कड़वा सच समझना होगा।
जैसे-जैसे आप अपना रिस्क रिवॉर्ड बढ़ाएंगे, वैसे-वैसे आपका विन रेट (Win Rate) कम होता जाएगा।
इसका कारण यह है कि मार्केट हर दिन एकतरफा बड़ी मूव नहीं देता। अगर आप जबरदस्ती 1:5 का टारगेट लगा कर बैठेंगे, तो कई बार मार्केट 1:3 तक जाकर वापस लौट आएगा और आपका स्टॉपलॉस हिट कर देगा।
इसलिए, शुरुआत करने के लिए 1:2 या 1:3 का रेशियो सबसे बेस्ट और प्रैक्टिकल माना जाता है। इसमें आपको ट्रेड्स भी आसानी से मिलते हैं और आपका प्रॉफिट भी बड़ा होता है।
रिस्क रिवॉर्ड फॉलो करते समय ट्रेडर्स की 3 बड़ी गलतियाँ
अगर आप Risk Reward Ratio in Hindi का पालन करना चाहते हैं, तो आपको अपनी साइकोलॉजी पर काबू पाना होगा। ज्यादातर ट्रेडर्स इन 3 गलतियों के कारण फेल होते हैं:
1.डर के मारे जल्दी एग्जिट करना: ट्रेड लेने के बाद जैसे ही थोड़ा सा प्रॉफिट (जैसे 1:0.5 या 1:1) दिखता है, ट्रेडर्स डर जाते हैं और पूरा टारगेट आने से पहले ही बाहर निकल जाते हैं।
2. लॉस होने पर स्टॉपलॉस को पीछे खिसकाना: जब ट्रेड नुकसान में जाने लगता है, तो ट्रेडर्स इस उम्मीद में अपने स्टॉपलॉस को और बड़ा कर देते हैं कि मार्केट कभी तो वापस आएगा। यह ट्रेडिंग में आत्महत्या करने जैसा है।
3. बिना लॉजिक के बड़ा टारगेट रखना: चार्ट पर कोई रेसिस्टेंस (Resistance) स्तर पास में ही है, लेकिन ट्रेडर बिना किसी लॉजिक के जबरदस्ती 1:5 का टारगेट सेट कर देता है। टारगेट हमेशा चार्ट के अनुसार होना चाहिए, मनमुताबिक नहीं।
Also Read: Stop Loss क्या है? जानिए लाइव ट्रेडिंग में बड़े नुकसान को कम करने के 5 जादुई तरीके
निष्कर्ष और ट्रेडर चेक्लिस्ट (Summary Checklist)
रिस्क रिवॉर्ड कोई जादुई ट्रिक नहीं है, बल्कि यह शुद्ध गणित (Mathematics) है। अगर आप एक एवरेज ट्रेडर भी हैं जो आधे से ज्यादा समय गलत साबित होता है, तो भी यह अकेला हथियार आपको महीने के अंत में एक प्रॉफिटेबल ट्रेडर बना देगा।
अगली बार जब भी आप कोई ट्रेड लें, तो अपनी डायरी में इस 3-स्टेप चेक्लिस्ट को जरूर टिक करें:
- क्या मेरा स्टॉपलॉस (Risk) मेरे बजट और रिस्क कैपिटल के अंदर है?
- क्या चार्ट के लॉजिक के हिसाब से मुझे कम से कम 1:2 का टारगेट मिल रहा है?
- क्या मैं इस ट्रेड के खत्म होने तक अपने प्लान पर बिना डरे टिका रहूँगा?
हमेशा याद रखें — लॉस को छोटा रखें और प्रॉफिट को बड़ा होने दें!
FAQs
उत्तर: ट्रेडिंग में रिस्क रिवॉर्ड रेशियो (Risk-Reward Ratio) एक ऐसा पैमाना है, जो यह बताता है कि आप ₹1 का नुकसान (Risk) सहने के बदले कितने रुपए का मुनाफा (Reward) कमाने की योजना बना रहे हैं। उदाहरण के लिए, 1:2 रेशियो का मतलब है कि ₹500 के स्टॉपलॉस पर आपका टारगेट ₹1000 का है।
उत्तर: इंट्राडे और शुरुआती ट्रेडर्स के लिए 1:2 या 1:3 का रिस्क रिवॉर्ड रेशियो सबसे बेस्ट और व्यावहारिक माना जाता है। इससे कम (जैसे 1:1) रेशियो रखने पर ब्रोकरेज और टैक्स कटने के बाद आप अंत में नेट लॉस (घाटे) में रह सकते हैं।
उत्तर: हाँ, यदि आपका रिस्क रिवॉर्ड रेशियो बड़ा (जैसे 1:3 या 1:4) है, तो आप सिर्फ 30% से 40% विन रेट होने पर भी महीने के अंत में एक प्रॉफिटेबल ट्रेडर बन सकते हैं। बड़े रेशियो का फायदा यह है कि एक ही सही ट्रेड आपके पिछले 3-4 स्टॉपलॉस के नुकसान को आसानी से रिकवर कर देता है।
उत्तर: लाइव चार्ट पर रिस्क रिवॉर्ड देखने के लिए ट्रेडिंगव्यू (TradingView) या अपने ब्रोकर के चार्टिंग सॉफ्टवेयर पर दो मुख्य टूल्स का उपयोग किया जाता है:
a) Long Position Tool: मार्केट में शेयर या क्रिप्टो खरीदते समय (Buy)।
b) Short Position Tool: मार्केट में शॉर्ट-सेलिंग करते समय (Sell)।
उत्तर: कड़वा सच यह है कि जैसे-जैसे आप अपना रिस्क रिवॉर्ड रेशियो बढ़ाएंगे, आपका विन रेट (Win Rate) कम होता जाएगा। मार्केट हर दिन एकतरफा बड़ी मूव नहीं देता, इसलिए जबरदस्ती बड़ा टारगेट रखने पर कई बार मार्केट आपके टारगेट के पास से घूमकर स्टॉपलॉस हिट कर देता है।