“हेलो दोस्तों! मैं हूँ भूषण जलछत्री। अपने इस ब्लॉग The Breakeven Trader पर हम हमेशा रिस्क मैनेजमेंट की बात करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि प्रॉफिट कमाने के बाद Crypto Tax in India के नियमों को समझना और टैक्स बचाना भी आपकी कैपिटल (पूंजी) सुरक्षित रखने का ही एक अहम हिस्सा है?”
भारत में क्रिप्टोकरेंसी और सभी Virtual Digital Assets (VDA) पर टैक्स के नियम बहुत कड़े हैं. बजट 2026 के बाद सरकार ने टैक्स की दरों में कोई छूट नहीं दी है. बल्कि अब ट्रांजैक्शन की रिपोर्टिंग न करने पर भारी पेनल्टी लगा दी है.
आज हम बहुत ही सरल भाषा में समझेंगे कि Crypto Tax in India का असली गणित क्या है.
💡 Key Point
- फ्लैट 30% टैक्स: भारत में क्रिप्टो प्रॉफिट पर बिना किसी स्लैब छूट के फ्लैट 30% टैक्स + 4% सेस (कुल 31.2%) लगता है।
- नो लॉस सेट-ऑफ: एक क्रिप्टो कॉइन का नुकसान दूसरे कॉइन के मुनाफे से एडजस्ट (Set-off) नहीं किया जा सकता।
- 1% TDS अनिवार्य: हर सेल या ट्रांसफर ट्रांजैक्शन पर 1% TDS कटता है, जिसे आप ITR में क्लेम कर सकते हैं।
- विदेशी एक्सचेंज भी रडार पर: CARF के तहत सरकार के पास इंटरनेशनल एक्सचेंजेस (Binance आदि) का डेटा भी पहुंच रहा है, इसलिए रिपोर्टिंग न करने पर भारी पेनल्टी हो सकती है।
Crypto Tax Rate : मुख्य नियम क्या हैं?

भारत में क्रिप्टो टैक्स के 3 मुख्य स्तंभ: 1% TDS, 30% फ्लैट टैक्स, और नो लॉस सेट-ऑफ नियम।भारत में क्रिप्टो से होने वाली कमाई पर सीधे Flat 30% Tax लगता है. इसके साथ ही 4% सेस (Cess) भी जुड़ता है. इस तरह प्रभावी टैक्स रेट 31.2% हो जाता है.
यहाँ क्रिप्टो टैक्स का एक आसान ओवरव्यू दिया गया है:
| ट्रांजैक्शन का प्रकार | टैक्स रेट (Tax Rate) | मुख्य नियम |
|---|---|---|
| क्रिप्टो ट्रेडिंग प्रॉफिट | 31.2% (30% + 4% Cess) | फ्लैट रेट, कोई स्लैब छूट नहीं मिलेगी |
| 1% TDS (Section 194S) | 1% | हर सेल या ट्रांसफर ट्रांजैक्शन पर कटेगा |
| लॉस सेट-ऑफ (Loss Set-off) | ❌ लागू नहीं | एक कॉइन का लॉस दूसरे के प्रॉफिट से एडजस्ट नहीं होगा |
| खर्चों की छूट (Deductions) | ❌ लागू नहीं | बिजली, इंटरनेट या ब्रोकरेज का खर्च नहीं घटेगा |
क्रिप्टो टैक्स के 4 कड़े नियम (ट्रेडर्स के लिए जरूरी)
क्रिप्टो मार्केट में कदम रखने से पहले इन चार नियमों को अच्छी तरह समझ लें:
1. नो लॉस सेट-ऑफ (No Set-off & Carry Forward)
मान लीजिए आपने Bitcoin में ₹50,000 का प्रॉफिट कमाया. दूसरी तरफ, आपको Ethereum में ₹30,000 का नुकसान हो गया. आप इस नुकसान को प्रॉफिट के सामने एडजस्ट नहीं कर सकते. आपको पूरे ₹50,000 के प्रॉफिट पर 30% टैक्स देना ही होगा.
2. कोई एक्स्ट्रा डिडक्शन नहीं (No Deductions)
ट्रेडिंग के दौरान आप केवल खरीदने की लागत (Cost of Acquisition) ही घटा सकते हैं. एक्सचेंज की ब्रोकरेज फीस, इंटरनेट का खर्च या फोन का बिल प्रॉफिट में से माइनस नहीं किया जा सकता.
3. क्रिप्टो स्वैप (Crypto-to-Crypto Swap)
अगर आप किसी एक्सचेंज पर सीधे Bitcoin (BTC) से Solana (SOL) स्वैप करते हैं, तो सरकार इसे भी सेल मानती है. स्वैप के समय जो भी INR वैल्यू होगी, उसके प्रॉफिट पर आपको 30% टैक्स देना होगा.
4. होल्डिंग पीरियड का कोई फायदा नहीं
शेयर मार्केट की तरह क्रिप्टो में लॉन्ग-टर्म या शॉर्ट-टर्म जैसा कोई नियम नहीं है. आप क्रिप्टो को 2 दिन होल्ड करें या 2 साल, टैक्स हमेशा फ्लैट 30% ही रहेगा.
Also Read: ट्रेडिंग में कामयाब बनने का असली फॉर्मूला: सही Position Size और Risk Management
Bitcoin Futures और Intraday प्रॉफिट पर टैक्स का नियम
कई ट्रेडर्स मुझसे पूछते हैं कि अगर हम बिटकॉइन फ्यूचर्स (Bitcoin Futures) में इंट्राडे ट्रेडिंग करके पैसे कमाते हैं, तो क्या उस पर भी टैक्स लगेगा?” इसका जवाब है: हाँ, बिल्कुल टैक्स लगेगा! लेकिन टैक्स की दर इस बात पर निर्भर करती है कि आप कहाँ ट्रेड कर रहे हैं:
1. इंटरनेशनल क्रिप्टो एक्सचेंजेस (Binance, Bybit आदि) पर फ्यूचर्स ट्रेडिंग:
- टैक्स रेट: सीधे Flat 30% Tax (प्लस सेस) [VDA Taxation rules]।
- सबसे बड़ा रिस्क: क्रिप्टो एक्सचेंजेस पर होने वाले फ्यूचर्स, ऑप्शंस (F&O) और इंट्राडे ट्रेड्स भी VDA के दायरे में आते हैं [VDA Taxation rules]। इसका मतलब है कि यहाँ भी लॉस सेट-ऑफ लागू नहीं होता [VDA Taxation rules]। अगर आपने दिन में 5 ट्रेड्स प्रॉफिट में बंद किए और 3 ट्रेड्स लॉस में, तो आपको उन 5 प्रॉफिट वाले ट्रेड्स पर पूरा टैक्स देना होगा, भले ही दिन के अंत में आपका नेट P&L लॉस में क्यों न हो [VDA Taxation rules]!
2. भारतीय रेगुलेटेड ब्रोकर्स के जरिए क्रिप्टो आधारित फंड्स/ETF:
- टैक्स रेट: आपके नॉर्मल टैक्स स्लैब (Slab Rate) के अनुसार।
- फायदा: यदि आप मान्यता प्राप्त स्टॉक ब्रोकर्स (जैसे Zerodha, Groww) के माध्यम से भारतीय नियमों के तहत आने वाले इंटरनेशनल फंड्स या ईटीएफ में इंट्राडे करते हैं, तो इसे स्पेक्युलेटिव बिजनेस इनकम (Speculative Business Income) माना जाता है। यहाँ आपको इंट्राडे के घाटे को उसी साल के दूसरे इंट्राडे प्रॉफिट से एडजस्ट (Set-off) करने की सुविधा मिलती है।
Note: ट्रेडर्स निवेश करने से पहले अपने CA (Chartered Accountant) से सलाह जरूर लें।
Also Read: ट्रेडिंग में FOMO क्या है और इससे कैसे बचें? (Tested Rules)
Crypto Mining, Staking और Airdrops पर टैक्स

बहुत से लोग सोचते हैं कि टैक्स सिर्फ ट्रेडिंग पर लगता है, लेकिन ऐसा नहीं है. अगर आप माइनिंग, स्टेकिंग या एयरड्रॉप से क्रिप्टो कमाते हैं, तो टैक्स दो स्टेज में लगता है:
क्रिप्टो माइनिंग (Crypto Mining Tax)
यह कैसे काम करता है? शक्तिशाली कंप्यूटर और बिजली का उपयोग करके क्रिप्टो नेटवर्क के मुश्किल गणितीय समीकरणों (Math Puzzles) को हल किया जाता है। इसके बदले में माइनर को इनाम के रूप में नए कॉइन्स मिलते हैं।
उदाहरण: जैसे ज़मीन खोदकर सोना निकाला जाता है, वैसे ही कंप्यूटर पावर से बिटकॉइन निकाला (माइन) किया जाता है।
- प्राप्ति पर टैक्स: जब आपको माइनिंग रिवॉर्ड के रूप में नया कॉइन मिलता है, तो उस दिन मार्केट में उसकी जो कीमत (Fair Market Value) होगी, वह आपकी इनकम मानी जाएगी. यह आपके नॉर्मल टैक्स स्लैब रेट के अनुसार टैक्स होगी.
- सेल करने पर टैक्स: जब आप उस माइनिंग किए गए कॉइन को बेचेंगे, तो बेचने पर होने वाले पूरे मुनाफे पर 30% टैक्स लगेगा. माइनिंग के लिए उपयोग हुए कंप्यूटर या बिजली के बिल की कोई छूट नहीं मिलेगी.
क्रिप्टो स्टेकिंग (Crypto Staking Tax)
यह कैसे काम करता है? आप अपने कुछ कॉइन्स को ब्लॉकचेन नेटवर्क को सुरक्षित और चालू रखने के लिए एक जगह जमा (Lock) कर देते हैं। नेटवर्क इसके बदले में आपको पैसिव इनकम के रूप में नए टोकन्स (ब्याज) देता है।
उदाहरण: जैसे बैंक में एफडी (FD) रखने पर हर महीने या साल में ब्याज मिलता है, वैसे ही स्टेकिंग में क्रिप्टो पर रिवॉर्ड मिलता है।
- स्टेकिंग से मिलने वाले नए टोकन्स को आपकी ‘पैसिव इनकम’ माना जाता है.
- जिस दिन यह टोकन आपके वॉलेट में क्रेडिट होंगे, उस दिन की मार्केट वैल्यू पर आपके स्लैब रेट के अनुसार टैक्स लगेगा. बाद में इसे बेचने पर 30% का अलग टैक्स देना होगा.
क्रिप्टो एयरड्रॉप (Crypto Airdrop Tax)
यह कैसे काम करता है? जब कोई नया क्रिप्टो प्रोजेक्ट मार्केट में आता है, तो वह अपने प्रमोशन (Marketing) के लिए शुरुआती यूज़र्स को बिना किसी पैसे के मुफ्त में कॉइन्स देता है। इसके लिए यूज़र्स को केवल छोटे-मोटे टास्क (जैसे सोशल मीडिया पर फॉलो करना) पूरे करने होते हैं।
उदाहरण: जैसे कोई नई कंपनी अपनी पब्लिसिटी के लिए मार्केट में मुफ्त सैम्पल्स (Free Samples) बांटती है, ठीक वैसे ही एयरड्रॉप काम करता है।
- एयरड्रॉप में मिलने वाले फ्री टोकन्स को टैक्स के नियमों में ‘गिफ्ट’ की तरह देखा जाता है.
- यदि सालभर में मिले एयरड्रॉप्स की कुल वैल्यू ₹50,000 से अधिक है, तो उस पूरी वैल्यू पर आपको अपने स्लैब रेट के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा.
1% TDS (Section 194S) क्या है?
जब भी आप भारतीय एक्सचेंज पर कोई क्रिप्टो बेचते हैं, तो एक्सचेंज 1% TDS काटता है.
- क्यों कटता है? सरकार इसके जरिए आपकी हर क्रिप्टो ट्रांजैक्शन पर नजर रखती है.
- क्या यह अतिरिक्त टैक्स है? नहीं, यह एक एडवांस टैक्स है. साल के अंत में ITR फाइल करते समय आप इस टीडीएस को अपनी कुल टैक्स लायबिलिटी के साथ एडजस्ट कर सकते हैं.
लेटेस्ट बजट का नया अपडेट: रिपोर्टिंग न करने पर भारी पेनल्टी
फाइनेंस बिल तहत सरकार ने टैक्स चोरी रोकने के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है.
- ₹200 प्रति दिन का जुर्माना: अगर कोई क्रिप्टो प्लेटफॉर्म या रिपोर्टिंग एंटिटी यूजर की ट्रांजैक्शन डिटेल्स समय पर जमा नहीं करती है, तो उस पर ₹200 प्रति दिन का जुर्माना लगेगा.
- गलत जानकारी पर ₹50,000 पेनल्टी: अगर आपके क्रिप्टो डेटा में कोई गलत जानकारी पाई जाती है, तो भारी वित्तीय पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है.
- विदेशी एक्सचेंजेस (Binance आदि) पर नजर: भारत सरकार Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) के तहत विदेशी सरकारों के साथ डेटा शेयर कर रही है. इसलिए इंटरनेशनल एक्सचेंजेस का डेटा भी अब सीधे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के पास पहुंच रहा है.
क्रिप्टो टैक्स के लिए कौन सा ITR फॉर्म भरें?
क्रिप्टो की हर एक ट्रांजैक्शन की जानकारी देने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न में Schedule VDA भरना अनिवार्य है.
- ITR-2: यदि आप क्रिप्टो को सिर्फ एक इन्वेस्टर (Capital Gains) की तरह होल्ड करते हैं.
- ITR-3: यदि आप एक इंट्राडे या हाई-वॉल्यूम डे-ट्रेडर हैं और इसे अपने बिजनेस की तरह चलाते हैं.
सुरक्षित ट्रेडिंग कैसे करें?
- FIU कम्प्लायंट एक्सचेंज चुनें: हमेशा WazirX या CoinDCX जैसे भारत सरकार (FIU-IND) के साथ रजिस्टर्ड एक्सचेंजेस का ही इस्तेमाल करें.
- टैक्स कैलकुलेटर का इस्तेमाल करें: अपनी एक-एक ट्रांजैक्शन का सही हिसाब रखने के लिए KoinX या CoinTracker जैसे टूल्स की मदद लें.
P2P ट्रेडिंग: प्रॉफिट से ज्यादा बैंक अकाउंट फ्रीज होने का रिस्क

इंटरनेशनल एक्सचेंजेस (जैसे Binance या Bybit) पर P2P (Peer-to-Peer) ट्रेडिंग करना आजकल बहुत खतरनाक हो चुका है।
- अकाउंट फ्रीज क्यों होते हैं? कई बार P2P स्कैमर्स चोरी या धोखाधड़ी का पैसा सीधे आपके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं। साइबर सेल (Cyber Cell) जांच के दौरान आपका अकाउंट फ्रीज कर देती है।
- टैक्स का चक्कर: P2P ट्रांजैक्शंस पर भी 1% TDS लागू होता है। इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म्स पर इसका रिकॉर्ड नहीं रहता, जिससे आगे चलकर इनकम टैक्स विभाग से भारी छुपाए गए टैक्स का नोटिस आ सकता है।
क्रिप्टो गिफ्ट (Crypto Gift) मिलने पर टैक्स के नियम
अगर आपको किसी मित्र या परिवार के सदस्य से क्रिप्टोकरेंसी गिफ्ट में मिलती है, तो टैक्स का नियम इस प्रकार है:
- ₹50,000 की लिमिट: यदि सालभर में मिले सभी क्रिप्टो गिफ्ट्स की कुल वैल्यू ₹50,000 से कम है, तो कोई टैक्स नहीं लगेगा।
- फ्लैट टैक्स: यदि गिफ्ट की कुल वैल्यू ₹50,000 से ₹1 भी ऊपर जाती है, तो उसे आपकी अन्य स्रोतों से आय (Income from Other Sources) माना जाएगा। उस पर आपको अपने स्लैब रेट के अनुसार टैक्स देना होगा।
- करीबी रिश्तेदार: माता-पिता, भाई-बहन या जीवनसाथी से मिलने वाले क्रिप्टो गिफ्ट्स पर टैक्स की छूट मिलती है, लेकिन उन्हें बेचते समय होने वाले मुनाफे पर 30% टैक्स देना होगा।
टैक्स चोरी और गलत रिपोर्टिंग पर जेल के कड़े नियम
भारत सरकार क्रिप्टो को लेकर बहुत सख्त है। यदि कोई जानबूझकर क्रिप्टो से होने वाली कमाई को छुपाता है, तो भारी वित्तीय नुकसान के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है:
- 3 साल से 7 साल तक की जेल: यदि टैक्स चोरी की रकम बड़ी है और रिटर्न में जानबूझकर एसेट्स छुपाए गए हैं, तो इनकम टैक्स एक्ट के तहत जेल की सजा का प्रावधान है।
- 100% से 300% तक पेनल्टी: पकड़े जाने पर न केवल बकाया टैक्स देना होगा, बल्कि उस टैक्स राशि पर 100% से लेकर 300% तक की भारी पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है।
क्रिप्टो माइनिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: खर्चों पर सरकार का अंतिम फैसला
यदि आप बड़े पैमाने पर माइनिंग सेटअप (Mining Rig) चलाते हैं, तो यह नियम ध्यान से समझें:
- कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expense): ग्राफिक कार्ड (GPU), ए ASIC माइनर्स, या कूलिंग सिस्टम खरीदने के खर्च को आप अपनी क्रिप्टो आय से नहीं घटा सकते।
- बिजली और मेंटेनेंस: माइनिंग सेटअप चलाने के लिए भारी बिजली का बिल आता है. सरकार इस खर्च को बिजनेस एक्सपेंस के रूप में स्वीकार नहीं करती है.
- नियम का सारांश: आप सेटअप पर चाहे जितने लाख रुपये खर्च कर दें, टैक्स केवल कॉइन की मार्केट वैल्यू (Fair Market Value) पर ही लगेगा.
स्क्रूटनी नोटिस (Scrutiny Notice) और सोर्स ऑफ इनकम वेरिफिकेशन
आयकर विभाग (Income Tax Department) अब बड़े क्रिप्टो ट्रांजैक्शंस की डेटा माइनिंग कर रहा है. नोटिस से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- सफेद धन का प्रमाण (Source of Funds): आपने क्रिप्टो खरीदने के लिए जो पैसा लगाया, उसका सोर्स साफ होना चाहिए. वह आपकी घोषित सैलरी, बिजनेस इनकम या सेविंग्स से होना चाहिए.
- कैश डिपॉजिट से बचें: यदि आप बैंक अकाउंट में नकद (Cash) जमा करके उससे क्रिप्टो खरीद रहे हैं, तो तुरंत विभाग की एआई-सिस्टम (AI-System) आपको फ्लैग कर देगी.
- डेटा मैचिंग: आपके ITR का Schedule VDA डेटा, एक्सचेंज द्वारा काटे गए 1% TDS (Form 26AS) से हूबहू मैच होना चाहिए.
DEX और लिक्विडिटी पूल्स (Liquidity Pools) पर टैक्स का गणित
अगर आप सेंट्रलाइज्ड एक्सचेंज छोड़कर डैप्स (dApps) और लिक्विडिटी पूल्स का इस्तेमाल करते हैं:
- लिक्विडिटी प्रोवाइडर (LP) टोकन: जब आप किसी पूल में फंड डालते हैं और आपको बदले में LP टोकन मिलते हैं, तो उसे भी ‘एसेट ट्रांसफर’ माना जा सकता है.
- यील्ड फार्मिंग (Yield Farming): पूल्स से मिलने वाली दैनिक या साप्ताहिक फीस/रिवॉर्ड्स को स्टेकिंग की तरह ही ‘अदर सोर्सेज की इनकम’ माना जाएगा. इस पर भी प्राप्ति के दिन की वैल्यू पर टैक्स देना होगा.
क्रिप्टो टैक्स बचाने का लीगल तरीक़ा (Crypto Tax Savings)
क्या भारत में क्रिप्टो टैक्स बचाने का कोई लीगल तरीक़ा है? इसका सीधा जवाब है: बहुत कम रास्ते हैं। लेकिन आप इन दो बातों का ध्यान रखकर अनचाहे टैक्स से बच सकते हैं:
- होल्डिंग स्ट्रेटेजी (HODL): जब तक आप क्रिप्टो को बेचते (Sell) नहीं हैं या किसी दूसरे कॉइन में स्वैप नहीं करते, तब तक कोई टैक्स नहीं लगता। इसलिए बार-बार ट्रेड करने के बजाय लंबे समय के लिए होल्ड करना टैक्स के इवेंट्स को कम करता है।
- लॉस बुक न करें: चूंकि क्रिप्टो में लॉस सेट-ऑफ नहीं होता, इसलिए टैक्स बचाने के लिए जानबूझकर लॉस बुक (Tax-loss Harvesting) करने का कोई फ़ायदा नहीं है।
NFT, DeFi और Web3 Gaming पर टैक्स का नियम
सरकार की नज़र सिर्फ नॉर्मल क्रिप्टो कॉइन्स पर नहीं है। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) की परिभाषा में ये सब शामिल हैं:
- NFT (Non-Fungible Tokens): यदि आप डिजिटल आर्ट या एनएफटी बेचकर प्रॉफिट कमाते हैं, तो उस पर भी फ्लैट 30% टैक्स लगेगा।
- DeFi (Decentralized Finance) लेंडिंग: अगर आप बिना किसी एक्सचेंज के सीधे किसी को क्रिप्टो उधार (Lending) देते हैं और ब्याज कमाते हैं, तो वह ब्याज आपकी इनकम मानी जाएगी और स्लैब रेट के अनुसार टैक्स होगी।
- Play-to-Earn (Web3) गेम्स: गेम खेलकर मिलने वाले फ्री कॉइन्स या इन-गेम एसेट्स को एयरड्रॉप या गिफ्ट की तरह माना जाएगा। ₹50,000 से ऊपर की वैल्यू होने पर इस पर टैक्स देना होगा।
वित्तीय वर्ष के लिए क्रिप्टो टैक्स चेकलिस्ट
- ट्रेड लॉग्स डाउनलोड करें: हर महीने अपने सभी एक्सचेंजेस (भारतीय और विदेशी) से ट्रेड हिस्ट्री और P2P हिस्ट्री डाउनलोड करके एक्सेल शीट में सेव करें।
- TDS सर्टिफिकेट (Form 26AS/AIS) चेक करें: समय-समय पर अपना AIS (Annual Information Statement) चेक करें कि एक्सचेंजेस ने आपका 1% TDS सरकार के पास जमा किया है या नहीं।
- विदेशी वॉलेट्स का रिकॉर्ड रखें: अगर आप Trust Wallet, MetaMask या Ledger हार्डवेयर वॉलेट यूज़ करते हैं, तो उनके पब्लिक एड्रेस और ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड अलग से रखें (ITR में Schedule FA भरने के लिए)।
- टैक्स के लिए फंड अलग रखें: हर प्रॉफिटेबल ट्रेड के बाद उसके टैक्स का हिस्सा (30%) अपने बैंक अकाउंट में अलग रखते जाएं, ताकि मार्च में टैक्स चुकाते समय पैसों की कमी न हो।

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निष्कर्ष (Conclusion)
ट्रेडिंग में जिस तरह सही Position Size आपको बड़े नुकसान से बचाता है, ठीक उसी तरह सही Tax Planning आपको कानूनी पेनल्टी से बचाती है. प्रॉफिट कमाना जितना जरूरी है, नियमों के दायरे में रहकर कैपिटल सुरक्षित रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है.
- बाजार जोखिम चेतावनी: डिजिटल एसेट बाजार में ट्रेडिंग अत्यधिक जोखिमों के अधीन है. मैं कोई SEBI-रजिस्टर्ड सलाहकार नहीं हूँ. यह लेख केवल एजुकेशनल उद्देश्य के लिए है.
FAQs
Ans: हाँ, भारत में क्रिप्टोकरेंसी या किसी भी वर्चुअल डिजिटल एसेट (VDA) से होने वाले मुनाफे पर टैक्स देना 100% अनिवार्य है। यदि आप टैक्स नहीं चुकाते हैं, तो आयकर विभाग द्वारा भारी पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
Ans: नहीं, भारत के टैक्स नियमों के अनुसार क्रिप्टो में हुए नुकसान को आप किसी अन्य प्रॉफिट के साथ एडजस्ट (Set-off) नहीं कर सकते हैं। आपको हर प्रॉफिटेबल ट्रेड पर अलग से पूरा 30% टैक्स देना होगा।
Ans: यदि आपको सालभर में ₹50,000 से अधिक मूल्य का क्रिप्टो गिफ्ट में मिलता है, तो उस पर आपके नॉर्मल टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगेगा। हालांकि, करीबी रिश्तेदारों से मिलने वाले गिफ्ट पर टैक्स की छूट मिलती है।
Ans: 1% TDS कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं है बल्कि यह एक एडवांस टैक्स है। साल के अंत में जब आप अपना ITR (Income Tax Return) फाइल करेंगे, तब आप इस टीडीएस राशि का रिफंड क्लेम कर सकते हैं या अपनी कुल टैक्स देनदारी के साथ एडजस्ट कर सकते हैं।
Ans: बिल्कुल नहीं। भारत सरकार इंटरनेशनल एक्सचेंजेस से Crypto-Asset Reporting Framework (CARF) के तहत डेटा शेयर कर रही है। विदेशी एक्सचेंज पर डेटा छुपाने या गलत जानकारी देने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत भारी जुर्माना लग सकता है।